वामपंथी उग्रवाद प्रभाग

प्रभाग के बारे में

इस प्रभाग का सृजन वामपंथी उग्रवाद की समस्या का समग्र रूप में प्रभावी तरीके से निराकरण करने के लिए मंत्रालय में 19 अक्तूबर, 2006 को किया गया था। वामपंथी उग्रवाद प्रभाग वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में क्षमता निर्माण के उद्देश्य से सुरक्षा संबंधी योजनाएं कार्यान्वित करता है। यह प्रभाग वामपंथी उग्रवाद की स्थिति तथा प्रभावित राज्यों द्वारा किए जा रहे प्रतिरोधी उपायों की निगरानी करता है। वामपंथी उग्रवाद प्रभाग वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यो में भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों की विभिन्न् विकास संबंधी योजनाओं के कार्यान्वयन का समन्वाय करता है। छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र्, मध्य‍ प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केरल राज्यों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित माना जाता है, हालांकि अलग-अलग राज्यों में वामपंथी उग्रवाद की स्थिति अलग-अलग है।

प्रभाग की भूमिका और कार्य

  • सुरक्षा संबंधी व्यय योजना, विशेष अवसंरचना योजना, विशेष केन्द्रीय सहायता आदि जैसी गृह मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला करने के लिए राज्यों का क्षमता निर्माण।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती।
  • वामपंथी उग्रवाद का मुकाबला करने की पहलों हेतु तात्कालिक प्रकृति की मदों के लिए निधियों के रूप में राज्यन सरकारों को सहायता प्रदान करना।
  • अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण/हेलीकॉप्टकर्स/नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम आदि के लिए केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को निधियां प्रदान करना।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करना तथा संबंधित राज्या सरकारों को सलाह और अलर्ट जारी करना।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों के लिए अन्य केन्द्रीय मंत्रालयों की विकास संबंधी योजनाओं के कार्यान्वयन का समन्वय।

संगठनात्मक चार्ट

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पृष्ठभूमि

कुछ दशकों से देश के दूर-दराज के तथा संचार के साधनों से अच्छी तरह न जुड़े कतिपय भागों में अनेक वामपंथी उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। वर्ष 2004 में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पीपल्स वार (पी डब्यून सक), जो पहले आंध्र प्रदेश में सक्रिय था, तथा माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (एम सी सी आई), जो पहले बिहार और पड़ोसी क्षेत्रों में सक्रिय था, का विलय करके सी पी आई (माओवादी) पार्टी बनी। सी पी आई (माओवादी) पार्टी एक प्रमुख वामपंथी उग्रवादी संगठन है जो हिंसा तथा नागरिकों और सुरक्षा बलों की हत्या की अधिकांश घटनाओं के लिए जिम्मेदार है तथा इसे इसके सभी गुटों तथा प्रमुख संगठनों सहित विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के अंतर्गत आतंकवादी संगठनों की अनुसूची में शामिल किया गया है। सरकार को उखाड़ फेकने के लिए सशस्त्र1 विद्रोह का सी पी आई (माओवादी) सिद्धान्त भारतीय संविधान और भारत राष्ट्र के संस्थांपक सिद्धांतों में स्वीकार्य नहीं है। सरकार ने हिंसा छोड़ने तथा बातचीत के लिए आगे आने के लिए वामपंथी उग्रवादियों का किया है। इस अनुरोध को उन्होंने अस्वीकार्य कर दिया है क्योंकि वे सत्ता हथियाने के साधन के रूप में हिंसा में विश्वास करते हैं। इसके परिणामस्विरूप भारत के अनेक भागों में हिंसा की निरंतर घटनाएं हुई हैं। आदिवासियों जैसे निर्धन और पिछड़े वर्ग इस हिंसा के शिकार हो रहे हैं। अनेक उदार बुद्धजीवी माओवादी विद्रोह के सिद्धान्त़, जो हिंसा को महिमा मंडित करता है तथा सत्ता हासिल करने के लिए सैन्य सिद्धांत को अपनाने में विश्वास करता है, के सही स्वरूप को समझे बिना माओवादी प्रचार का शिकार बन जाते हैं। वर्ष 2004 से 2018 (31.07.2018) तक भारत के विभिन्न भागों में वामपंथी उग्रवादियों द्वारा लगभग 7907 लोगों की हत्या की गई है। मारे गए अधिकांश नागरिक आदिवासी होते हैं जिनको बेरहमी से यातना दिए जाने और मारे जाने से पूर्व अक्सवर ‘पुलिस मुखबिर’ की संज्ञा दी जाती है। वास्तव में ये आदिवासी और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग, जिनके हित का समर्थन करने का माओवादी दावा करते हैं, भारत राष्ट्र के विरुद्ध सी पी आई (माओवादी) के कथित ‘प्रोट्रैक्टेलड पीपल्स वार’ के सबसे बड़े शिकार हुए हैं।

माओवादी विद्रोह का सिद्धान्त

  • समाज के कुछ वर्गों, विशेष रूप से युवा पीढ़ी में भ्रम के कारण माओवादियों के बारे में अच्छी सोच है जो उनकी विचारधारा की अपूर्ण समझ के कारण है। माओवादी विचारधारा की मुख्य थीम हिंसा है। माओवादी विद्रोह का सिद्धान्त हिंसा को मौजूदा सामाजिक व आर्थिक और राजनैतिक ढांचों को शिकस्त देने के मुख्य साधन के रूप में महिमा मंडित करता है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पीपल्स लिब्रेशन गुरिल्लाि आर्मी (पी एल जी ए), जो सी पी आई (माओवादियों) का सशस्त्र विंग है, का गठन किया गया है। विद्रोह के प्रथम स्तर पर पी एल जी ए गुरिल्ला युद्ध का सहारा लेता है जिसका प्रमुख उद्देश्य मौजूदा शासन व्यवस्था के ढांचों के बुनियादी स्तर पर रिक्तीता पैदा करना है। इस उद्देश्य को वे निम्न स्तर के सरकारी अधिकारियों, स्थानीय पुलिस थानों के पुलिस कार्मिकों, मुख्य धारा में शमिल राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं तथा पंचायतीराज प्रणाली के जनप्रतिनिधियों की हत्या करके हासिल करते हैं। राजनीति तथा शासन में रिक्तता पैदा करने के बाद वे आंदोलन में शामिल होने के लिए स्थानीय जनता पर दवाब डालते हैं। मौजूदा शासन ढांचे की वास्तविक कमियों का जोरदार प्रचार भी किया जाता है।
  • माओवादी आधिपत्य के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में शासन की गैर-मौजूदगी स्वत: स्पष्ट हो जाती है क्योंकि हत्याओं तथा डराने धमकाने से डिलीवरी सिस्टम ठप्प हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों पर नियंत्रण पाने के लिए माओवादियों की रणनीति का यह पहला कदम है। इसी बीच दिखावटी लोकतांत्रिक साधनों के माध्यम से अर्धशहरी तथा शहरी क्षेत्रों में लोगों को एकजुट करने के लिए अनेक प्रमुख संगठनों का गठन किया गया है। इनमें से अधिकांश संगठनों का नेतृत्व ऐसे सुप्रशिक्षित बुद्धिजीवियों द्वारा किया जाता है जिनका माओवादियों के विद्रोह के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास है। इस सिद्धान्त में विश्वास रखने वाले लोग सी पी आई (माओवादी) की विचारधारा के हिंसक स्वरूप को छुपाने के लिए एक मुखौटा के रूप में कार्य करते हैं। ये इस पार्टी के प्रचार/दुष्प्र्चार तंत्र का भाग होते हैं।
  • ये सुरक्षा बलों द्वारा ‘जनजातियों के विस्थाापन’ ‘कॉरपोरेट शोषण’ ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ आदि जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाते हैं और इस संबंध में ऊटपटांग दावे करते हैं जिन्हें मुख्य धारा से जुड़े मीडिया द्वारा भी प्रचारित किया जाता है। ये प्रमुख संगठन माओवादी एजेंडा को आगे बढ़ाने तथा प्रवर्तन प्रणाली को कमजोर करने के लिए बड़ी चतुराई से शासकीय ढांचों तथा विधिक प्रक्रियाओं का भी प्रयोग करते हैं। इन संगठनों के महत्वापूर्ण कार्यों में ‘पेशेवर क्रान्तिकारियों’ की भर्ती, विद्रोह के लिए निधियां जुटाना, भूमिगत कॉडरों के लिए शहरी क्षेत्रों में शरण स्थल बनाना, गिरफ्तार किए गए काडरों को कानूनी सहायता प्रदान करना और प्रासंगिकता/सुविधाओं से संबंधित मुद्दों पर आंदोलन करके जन-समर्थन जुटाना शामिल है। इन प्रमुख संगठनों का उद्देश्य् माओवादी विचारधारा के संपूर्णतावादी तथा दमनकारी स्वारूप को छुपाने के लिए अल्पकालिक लोकतांत्रिक प्रणाली का बहाना करना है। सी पी आई (माओवादी) की भारत में अपने जैसी विचारधारा वाले विद्रोही/आतंकवादी संगठनों को मिलाकर ‘यूनाइटेड फ्रंट’ बनाने की भी एक रणनीतिक योजना है। यह ध्याेन रखना जरूरी है कि इनमें से अनेक संगठनों को भारत-विरोधी विदेशी ताकतों द्वारा सहायता की जाती है और सी पी आई (माओवादी) इस प्रकार के गठबंधन को रणनीतिक परिसंपत्तियां मानते हैं।
  • संक्षेप में सी पी आई (माओवादी), जो भारत में एक प्रमुख वामपंथी उग्रवादी संगठन है, का उद्देश्य अपने प्रमुख साधन के रूप में हिंसा तथा सहायक साधनों के रूप में प्रमुख संगठनों और स्ट्रेटेजिक यूनाइटेड फ्रंट्स के द्वारा विद्यमान लोकतांत्रिक ढांचे को उखाड़ फेंकना तथा कथित ‘न्यूक डेमोक्रेटिक रिवोल्यूिशन’ में अपने आपको स्थापित करने की योजना तैयार करना है। /li>

भारत सरकार का दृष्टिकोण

  • भारत सरकार का दृष्टिकोण, सुरक्षा, विकास, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकदारियों को सुनिश्चत करने, शासन प्रणाली में सुधार तथा जन अवबोधन प्रबंधन के क्षेत्रों में समग्र तरीके से वामपंथी उग्रवाद से निपटना है। इस दशकों पुरानी समस्या से निपटने के लिए, संबंधित राज्य सरकारों के साथ विभिन्न उच्चस्तरीय विचार-विमर्श और बातचीतों के बाद यह उपयुक्त समझा गया है कि तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभावी क्षेत्रों के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के परिणाम मिलेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए वामपंथी उग्रवादी हिंसा के संबंध में इसके विस्तार और प्रवृत्तियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और योजना तैयार करने, विभिन्न उपायों के कार्यान्वायन और उनकी निगरानी के संबंध में विशेष ध्यान देने के लिए ग्याारह राज्यों में 90 सर्वाधिक प्रभावित जिलों को लिया गया है। तथापि, चूंकि ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्थाष’ राज्य के विषय हैं, इसलिए कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की कार्रवाई मुख्यत: राज्यो सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है। केन्द्र सरकार स्थिति की गहन रूप से निगरानी करती है तथा अनेक तरीकों से उनके प्रयासों में सहायता और समन्वय करती है। इनमें केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल प्रदान करना; इंडिया रिजर्व बटालियनों की स्वीेकृति, विद्रोह प्रतिरोधी तथा आतंकवादरोधी विद्यालयों की स्थासपना; राज्य पुलिस तथा उनके सूचना तंत्र का आधुनिकीकरण और उन्नयन; सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के अंतर्गत सुरक्षा संबंधी व्यय की प्रतिपूर्ति; नक्सलरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर मुहैया कराना; रक्षा मंत्रालय, केन्द्रीय पुलिस संगठनों और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के माध्यम से राज्य पुलिस के प्रशिक्षण में सहायता करना सूचना का आदान-प्रदान अन्तर-राज्य समन्वय को सुगम बनाना; सामुदायिक पुलिस व्यवस्था तथा सिविक एक्शन कार्यक्रमों में सहायता करना आदि शामिल हैं। इसके पीछे सोच माओवादी खतरे से एक ठोस तरीके से निपटने के लिए राज्यी सरकारों की क्षमता में वृद्धि करने की है।

मॉनीटरिंग तंत्र

  • केन्द्रीय गृह मंत्री, गृह सचिव और विशेष सचिव/अपर सचिव तथा मंत्रिमंडल सचिव की अध्य्क्षता में एक समीक्षा समूह नियमित आधार पर वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा करता है। विभिन्न योजनाओं की प्रगति की संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्य सरकारों के साथ बैठक और वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गृह मंत्रालय द्वारा नियमित मॉनीटरिंग की जाती है।

हाल में की गई समीक्षाएं

  • केन्द्रीय गृह मंत्री ने मई, 2018 माह में छत्तीरसगढ़ और झारखंड का दौरा किया तथा वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा की।
  • केन्द्रीय गृह मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के मुख्य मंत्रियों की 9 फरवरी, 2015 और 08 मई, 2017 को बैठक बुलाई। छत्तीसगढ़ के मुख्य्मंत्री के साथ 03/11/2017 को बैठक की गई।
  • केन्द्रीय गृह मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में विकास संबंधी पहलों के बारे में 29.12.2017 को केन्द्रीय मंत्रियों तथा केन्द्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक की है।
  • गृह राज्या मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का दौरा किया तथा वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा की।
  • मंत्रिमंडल सचिव द्वारा हाल ही में 15/12/2016, 03/08/2017 और हाल ही में 27/7/2018 को समीक्षा समूह की बैठक आयोजित की गई।
  • केन्द्रीय गृह सचिव द्वारा केन्द्रीय मंत्रालयों के सचिवों तथा वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के मुख्य् सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और केन्द्रीय सशस्त्र् पुलिस बलों के महानिदेशकों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
  • केन्द्रीय गृह सचिव ने भी वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा करने के लिए वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का दौरा किया।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के लिए महत्वदपूर्ण पहलें

  • वामपंथी उग्रवाद की समस्याे का प्रभावी तरीके से समग्र रूप से निराकरण करने के लिए सरकार ने सुरक्षा, विकास, स्थाीनीय समुदायों के अधिकार और हकदारियां सुनिश्चित करने के क्षेत्रों में बहु-आयामी रणनीति अपनाते हुए राष्ट्रीाय नीति और कार्य योजना तैयार की है।
  • सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) की योजना: पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की अम्ब्रेला स्कीम की उप-योजना के रूप में 27.09.2017 को इस योजना का सरकार द्वारा 2020 तक 03 वर्ष की अवधि तक विस्तार किया गया। सुरक्षा संबंधी व्यय की योजना के अंतर्गत केन्द्र सरकार वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 11 राज्यों की राज्य सरकारों को सुरक्षा बलों की प्रशिक्षण एवं प्रचालन आवश्यकताओं से संबंधित 90 जिलों के सुरक्षा संबंधी व्यय, वामपंथी उग्रवादी हिंसा में मारे गए नागरिकों/सुरक्षा बल कार्मिकों के परिवारों को अनुग्रह राशि के भुगतान, संबंधित राज्य सरकार की समर्पण एवं पुनर्वास नीति के अनुसार समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कॉडरों को मुआवजे, सामुदायिक पुलिस व्यवस्था, ग्राम रक्षा समितियों के लिए सुरक्षा संबंधी अवसंरचना तथा प्रचार सामग्रियों पर होने वाली व्यय की प्रतिपूर्ति करती है। वार्षिक परिव्यय में काफी वृद्धि की गई है और वामपंथी उग्रवाद रोधी अभियानों के दौरान बल के अशक्त सुरक्षा कार्मिकों के लिए मुआवजे तथा संपत्ति की क्षति के लिए मुआवजे जैसी नई मदों को पहली बार इस योजना में शामिल किया गया है। सुरक्षा संबंधी व्यय की योजना का उद्देश्य वामपंथी उग्रवाद की समस्यां से निपटने में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों की क्षमता में वृद्धि करना है।
  • वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित 30 जिलों के लिए विशेष केन्द्रीय सहायता: यह योजना ‘पुलिस बलों के आधुनिकीकरण’ की अम्ब्रेला स्कीम की उप-योजना के रूप में सरकार द्वारा 27.09.2017 को 2017-18 से 2019-20 तक 3 वर्ष की अवधि के लिए अनुमोदित की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य तात्कालिक प्रकृतिक की सार्वजनिक सुविधाओं और सेवाओं में गंभीर कमियों को दूर करना है। वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक रूप से प्रभावित जिलों को भारत सरकार द्वारा 775 करोड़ रु. की राशि पहले ही जारी कर दी गई है।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यो में फोर्टीफाइड पुलिस स्टेशनों के निर्माण सहित विशेष अवसंरचना योजना: वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यो की नियमित मांग पर सरकार ने ‘पुलिस बलों के आधुनिकीकरण’ की अम्ब्रेला स्कीम की उप-योजना के रूप में यह योजना 2017-18 से 2019-20 तक 3 वर्ष की अवधि के लिए अनुमोदित की है।
  • फोर्टीफाइड पुलिस थानों की योजना: मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 10 राज्यों में 400 पुलिस थाने स्वी्कृत किए थे। इनमें से 393 पुलिस थानों का काम पूरा हो गया है।
  • वामपंथी उग्रवाद से निपटने की योजना के लिए केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता: यह योजना पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की अम्ब्रेला स्कीम की उप-योजना के रूप में 27.09.2017 को सरकार द्वारा 2017-18 से 2019-20 तक 03 वर्ष की अवधि के लिए अनुमोदित की गई है। इस योजना के अंतर्गत अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और हेलीकॉप्टर्स किराए पर लेने के लिए केन्द्रीय एजेंसियों (केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों/भारतीय वायु सेना आदि) को सहायता प्रदान की जाती है।
  • नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम: यह योजना पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की अम्ब्रेला स्कीम की उप-योजना के रूप में 27.09.2017 को सरकार द्वारा 2017-18 से 2019-20 तक 03 वर्ष की अवधि के लिए अनुमोदित की गई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम वैयक्तिक संपर्क के माध्यम से सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच दूरी को कम करने और स्थानीय लोगों के समक्ष सुरक्षा बलों का मानवीय चेहरा प्रदर्शित करने के लिए 2010-11 से लागू की जा रही है। यह योजना अपने लक्ष्य हासिल करने में बहुत सफल रही है। इस योजना के अंतर्गत स्थाानीय लोगों के कल्याण हेतु विभिन्न नागरिक गतिविधियां चलाने के लिए वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को निधियां जारी की जाती हैं।
  • मीडिया प्लान: यह योजना पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की अम्ब्रेेला स्कीम की उप-योजना के रूप में 27.09.2017 को सरकार द्वारा 2017-18 से 2019-20 तक 03 वर्ष की अवधि के लिए अनुमोदित की गई है। माओवादी मामूली प्रोत्साहनों के माध्यम से अपनी कथित गरीब हितैषी क्रांति के द्वारा अथवा अपनी बल प्रयोग की रणनीति को अपनाकर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में निर्दोष आदिवासियों/स्थानीय लोगों को गुमराह करते रहे हैं तथा उन्हे लुभाते रहे हैं। वे सुरक्षा बलों तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में दुष्प्रभचार करते हैं। अत: सरकार वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में इस योजना को लागू कर रही है। इस योजना के अंतर्गत एनवाईकेएस द्वारा ट्राइबल यूथ एक्सोचेंज कार्यक्रम, रेडियो जिंगल्से, डॉक्यूथमेंट्रीज, पेम्फ्ले ट्स आदि जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क आवश्यंकता योजना-। (आरआरपी-।): यह योजना 8 राज्यो अर्थात आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्ती:सगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 34 जिलों में सड़क संपर्क में सुधार करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में 5422 किमी. लंबी सड़कों के निर्माण की परिकल्पना की गई थी जिसमें से 30.04.2018 तक 4652 किमी. लंबी सड़कों का निर्माण कर लिया गया है।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (आरआरपी-।।): सरकार ने यह योजना वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 9 राज्यों के 44 जिलों में सड़क संपर्क में और सुधार करने के लिए 28.12.2016 को अनुमोदित की। इस योजना में 11725 करोड़ रु. की अनुमानित लागत से 5412 किमी. लंबी सड़कों तथा 126 पुलों के निर्माण की परिकल्पना की गई है। इस योजना में शामिल सड़कों का निर्धारण राज्य1 सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ परामर्श करके गृह मंत्रालय द्वारा कर लिया गया है।
  • वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर परियोजना: वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी में सुधार करने के लिए सरकार ने इन क्षेत्रों में 20.08.2014 को मोबाइल टॉवर्स लगाए जाने का अनुमोदन किया था और चरण-। में 2335 मोबाइल टावर्स लगाए गए हैं। भारत सरकार द्वारा इस परियोजना का चरण-।। अनुमोदित कर दिया गया है जिसके अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में 4072 मोबाइल टावर्स लगाए जाएंगे जिस पर 7330 करोड़ रु. का खर्च आएगा।
  • Aspirational District: गृह मंत्रालय को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 35 जिलों में Aspirational District programme की मॉनीटरिंग का काम सौंपा गया है।

निष्कर्ष

  • भारत सरकार का यह मानना है कि विकास और सुरक्षा संबंधी पहलों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए एक समग्र दृष्टिकोण से वामपंथी उग्रवाद की समस्या से सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है। तथापि यह स्प्ष्ट है कि वामपंथी उग्रवादी कम विकास जैसे मुख्यं कारणों का सार्थक तरीके से निराकरण करना नहीं चाहते हैं क्योंकि वे विद्यालय भवनों, सड़कों, रेल मार्गों, पुलों, स्वास्य्च अवसंरचना, संचार सुविधाओं आदि को व्या़पक रूप से लक्ष्य बनाने का सहारा लेते हैं। ये अपनी पुरानी विचारधारा को कायम रखने के लिए अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में लोगों को हासिये पर रखना चाहते हैं। इसके परिणामस्वनरूप वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव ने देश के अनेक भागों में विकास की प्रक्रिया को दशकों पीछे धकेल दिया है। इसे सिविल समाज तथा मीडिया द्वारा समझे जाने की आवश्य कता है, ताकि वामपंथी उग्रवादियों पर हिंसा छोड़ने, मुख्य धारा में शामिल होने तथा इस तथ्य को स्वीहकार करने के लिए दवाब बनाया जा सके कि 21वीं सदी के भारत की सामाजिक-आर्थिक तथा राजनीतिक सोच और आकांक्षाएं माओवादी दृष्टिकोण से पूरी नहीं हो सकतीं। इसके अतिरिक्त हिंसा और विनाश पर आधारित कोई विचारधारा ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सफल नहीं हो सकती जिसमें शिकायतों के निराकरण के वैध मंचों की व्यवस्था है।

अनुलग्नक:

क्रम संख्याशीर्षकडाउनलोड/लिंकDate of Issue
1बहुधा पूछे जाने वाले प्रश्ना डाउनलोड (99.31 KB) pdf17 Oct 2018

पी. एस. इस पोर्टल में माओवाद के बारे में सभी संदर्भ सी पी आई (माओवादी) तथा विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के अंतर्गत आतंकवादी संगठनों की अनुसूची में शामिल अन्य वामपंथी उग्रवादी संगठनों के संदर्भ में हैं।